दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की अरबों रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल विरासत विवाद अब और तेज होता दिख रहा है। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए ऐसे संकेत दिए हैं, जिससे इस मामले में फोरेंसिक जांच का रास्ता खुल सकता है।
कोर्ट की यह टिप्पणी संजय कपूर की वसीयत को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई की दिशा बदल सकती है और गोपनीयता से जुड़े कई सवाल भी खड़े करती है।
बच्चों ने की वसीयत की फोरेंसिक जांच की मांग
नवंबर 2025 से संजय कपूर और अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चे — समायरा कपूर और कियान कपूर — संजय कपूर की वसीयत की फोरेंसिक जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेज़ में गंभीर विसंगतियाँ हैं।
इस वसीयत में संजय कपूर के 30,000 करोड़ रुपये से अधिक के व्यावसायिक साम्राज्य का जिक्र है, जिस पर अब कई पक्ष अपना दावा पेश कर रहे हैं।
दिल्ली HC का अहम संकेत
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) गगनदीप जिंदल ने कोर्ट के 10 सितंबर 2025 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि
“किसी भी पक्ष को किसी भी दस्तावेज़ का निरीक्षण करने से नहीं रोका जा सकता।”
यह टिप्पणी इस ओर इशारा करती है कि संजय कपूर की वसीयत का निरीक्षण और आगे चलकर फोरेंसिक जांच अब लगभग अपरिहार्य हो सकती है। अब तक इस जांच का संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने कड़ा विरोध किया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 10 सितंबर 2025 के आदेश के खंड 8 के तहत, दोनों पक्षों को दस्तावेज़ों के निरीक्षण की अनुमति दी जानी चाहिए।
प्रिया कपूर की आपत्ति, लेकिन कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान प्रिया कपूर और अजारियास पक्ष के वकीलों ने समायरा और कियान की याचिका की वैधता पर सवाल उठाने की कोशिश की।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि न्यायमूर्ति ज्योति सिंह पहले ही निरीक्षण की अनुमति दे चुकी हैं। उन्होंने एक अन्य मामले में संयुक्त रजिस्ट्रार द्वारा दिए गए समान आदेश का भी हवाला दिया, जिससे रजिस्ट्रार सहमत नजर आए।
इसके बाद बचाव पक्ष ने समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 5 फरवरी की तारीख तय कर दी।
वसीयत की प्रामाणिकता पर सवाल
इस पूरे विवाद के केंद्र में संजय कपूर की वसीयत है, जिसकी प्रामाणिकता, हस्ताक्षर और इसके बनाए जाने की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
वसीयत में प्रिया कपूर को एकमात्र लाभार्थी बताया गया है, जबकि संजय कपूर के बच्चों और उनकी मां रानी कपूर को इसमें शामिल नहीं किया गया। यही पहलू इस केस को और संवेदनशील बना रहा है।
निष्पादक की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में एक और अहम नाम है श्रद्धा श्री मारवाह, जिन्हें वसीयत में निष्पादक (Executor) नियुक्त किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें इस नियुक्ति की जानकारी पहले नहीं थी और वसीयत की कॉपी उन्हें ऑरियस ग्रुप के कार्यकारी दिनेश अग्रवाल द्वारा ईमेल के जरिए मिली थी।
इन सभी लंबित सवालों को देखते हुए, रजिस्ट्रार ने सुश्री मारवाह को 10 दिनों के भीतर आवेदन दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है, जिससे उनकी भूमिका भी अब न्यायिक जांच के दायरे में आ गई है।
5 फरवरी पर टिकी नजरें
अब सभी की निगाहें 5 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह हाई-प्रोफाइल कोर्ट रूम ड्रामा एक बार फिर चर्चा में आएगा और यह तय होगा कि फोरेंसिक जांच को औपचारिक मंजूरी मिलती है या नहीं।
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